Friday, August 31, 2018

दो टेस्ट हारने के बाद कैसे जीती टीम इंडिया?

टेस्ट सिरीज़ के शुरुआती दो मैच गंवाने और ख़ासी आलोचना का सामना करने के बाद टीम इंडिया ने नॉटिंघम में खेला गया तीसरा टेस्ट जीत लिया है. पांचवें दिन 10 मिनट और 17 गेंदों में विराट कोहली की टीम को जीत का स्वाद मिल गया. इंग्लैंड में ये भारतीय टीम की सातवीं जीत है.
लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में एकतरफ़ा धुलाई के बाद 203 रनों की ये जीत टीम इंडिया के लिए क्या अहमियत रखती है, इसे आसानी से समझा जा सकता है. जो रूट ने टॉस जीतकर टीम इंडिया को पहले बल्लेबाज़ी की दावत दी और भारतीय टीम ने इसका पूरा फ़ायदा उठाया.
साल 2002 में हेडेंग्ली में मिली जीत के बाद ये जीत भी भारतीय टीम के लिए यादगार रहेगी. लेकिन जीत तक पहुंचना इतना आसान नहीं था. पहले दो टेस्ट में इंग्लैंड के प्रदर्शन से लग रहा था कि आगे भी ऐसा ही होने वाला है.
लेकिन भारतीय टीम ने इस बार दांव पलट दिया. बल्ला चला, गेंदबाज़ भी फ़ॉर्म में दिखे और फ़ील्डिंग भी वर्ल्ड क्लास साबित हुई. इस जीत के पांच बड़े कारण हैं जिन्होंने
इस टेस्ट सिरीज़ के पहले मैच में भी कप्तान विराट कोहली ने दोनों पारियों में मिलाकर 200 रन बनाए थे. लेकिन भारतीय टीम का दूसरा कोई बल्लेबाज़ उनका साथ नहीं दे सका. नतीजा ये हुआ कि चौथी पारी में महज़ 194 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही टीम इंडिया 31 रनों से मैच हार गई.
लेकिन तीसरे टेस्ट में कोहली के बल्ले ने फिर कमाल दिखाया और इस बार उन्हें दूसरे बल्लेबाज़ों का भी साथ मिला. संयोग से इस बार भी दोनों पारियों में उन्होंने 200 रन बनाए. पहली पारी में 97 रन और दूसरी में 103 रन.
साल 2014 वाली टेस्ट सिरीज़ में विराट कोहली का बल्ला ख़ामोश रहा था और उनकी काफ़ी आलोचना भी हुई थी. लेकिन इस बार ऐसा नहीं है. कप्तान रन बना रहे हैं और वो भी आक्रामक अंदाज़ में. सिरीज़ के तीन टेस्ट में खेली छह पारियों में कोहली ने अब तक कुल 440 रन बनाए हैं.
अब तक इस सिरीज़ में रन बनाने के मामले में वो सबसे आगे हैं. उनके नाम दो शतक और दो अर्द्धशतक हैं और औसत है 73.33. स्ट्राइक रेट है 58.43 का.
नॉटिंघम टेस्ट की पहली पारी में कोहली के 97 रन और अजिंक्ये रहाणे के 81 रनों की बदौलत भारतीय टीम 329 रनों के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंची थी. इस पारी में हार्दिक पंड्या के बल्ले ने निराश किया. उन्होंने महज़ 18 रन बनाए.
लेकिन किसी भी मैच में पंड्या से ध्यान हटाना आसान नहीं है. बल्ले ने उनका साथ नहीं दिया तो गेंद उनके साथ हो गई. इंग्लैंड की पहली पारी में हार्दिक पंड्या ने महज़ छह ओवर डाले और पांच विकेट लेकर मैच की शक्ल ही बदल दी.
ज़्यादा तेज़ रफ़्तार न होने के बावजूद पंड्या ने लाइन-लेंग्थ के बूते अंग्रेज़ बल्लेबाज़ों का जीना मुहाल कर दिया. वो क्रीज़ संभालते, गेंद बल्ले का किनारा चूमती और पीछे विकेटकीपर या स्लिप फ़ील्डर के हाथों में समा जाती.
ये किसी भी टेस्ट में पंड्या की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी है. इसके बाद भारतीय टीम की दूसरी पारी में तेज़ खेलते हुए उन्होंने 52 रन बनाए और भारत का कुल स्कोर 500 के पार चला गया. इस बीच उन्होंने ये भी कहा कि कपिल देव से उनकी तुलना बेमानी है. वो हार्दिक पंड्या हैं और वही रहना चाहते हैं.
इस सिरीज़ में अब तक भारतीय टीम इसलिए हार रही थी क्योंकि ऊपरी क्रम नई गेंद की चमक उतार नहीं पा रहा था और मध्यक्रम को स्विंग गेंदों के सामने परेशानी हो रही थी. लेकिन नॉटिंघम टेस्ट में ऐसा नहीं हुआ.
टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज़ों ने पहली पारी के बाद दूसरी पारी में सधी हुई शुरुआत की. शिखर धवन ने 63 गेंदों में 44 रन और के एल राहुल ने 33 गेंदों में 36 रन बनाए. पहली विकेट गिरी 60 पर और दूसरी 111 रनों पर.
सलामी बल्लेबाज़ों से अलग चेतेश्वर पुजारा ने भी दूसरी पारी में बढ़िया हाथ दिखाए और 208 गेंद खेलकर 72 रन बनाए. शुरुआती तीन बल्लेबाज़ों के बढ़िया खेल दिखाने के भरोसे टीम इंडिया ने सुनिश्चित किया कि इंग्लैंड के सामने ऐसा लक्ष्य रखा जाए, जिस तक पहुंचना उसके लिए मुश्किल हो जाए.
ज़ाहिर है, इस मैच में भारतीय टीम जीत तक इसलिए पहुंच सकी क्योंकि कोहली के अलावा दूसरे बल्लेबाज़ों ने भी अपने विकेट आसानी से नहीं दिए. स्विंग होती गेंदों को लीव किया गया और कमज़ोर गेंदों पर प्रहार भी.
कहते हैं कि बल्लेबाज़ को रन बनाने के लिए कई अच्छे शॉट की ज़रूरत होती है और गेंदबाज़ को विकेट चटकाने के लिए सिर्फ़ एक अच्छी गेंद चाहिए होती है. लेकिन यही एक गेंद कभी-कभी काफ़ी देर लगा देती है.
दूसरी पारी में इंग्लैंड की टीम 521 रनों के नामुमकिन लक्ष्य का पीछा कर रही थी और मक़सद मैच बचाना था. पहले इशांत शर्मा और फिर मोहम्मद शामी ने टीम इंडिया को बढ़िया शुरुआत दिलाई. इंग्लैंड के चार विकेट 62 रन पर गिर गए थे और लग रहा था कि मैच चाय तक ख़त्म हो जाएगा.
लेकिन इसके बाद जोस बटलर (106) और बेन स्टोक्स (62) के बीच लंबी साझेदारी हुई. दोनों ने मिलकर 363 गेंद खेली. फिर पारी के 80 ओवर पूरे होने के बाद गई गेंद मिली और बुमराह ने दिखाया कि वो इतने ख़तरनाक क्यों हैं.
पहले उन्होंने तेज़ी से अंदर आती गेंद पर बटलर को पगबाधा आउट किया और अगली ही गेंद पर बेयरस्टो को मिलती-जुलती गेंद पर बोल्ड कर पवेलियन लौटाया. बुमराह ने इस मैच में 85 रन देकर पांच विकेट झटके. और सबसे ज़रूरी ये है कि बटलर और स्टोक्स की ख़तरनाक होती जोड़ी को तोड़ा.
भारत को टेस्ट सिरीज़ में मुकाबले में रखा.

Friday, August 17, 2018

粮食汞污染:煤炭燃烧另一面

汞污染通常是一个与鱼类消费有关的问题。全球许多地区都建议孕妇和儿童食用汞含量低的鱼肉,以免对健康造成不良影响,包括甲基汞对神经系统的损伤。

但在全球最大的汞排放国中国,给人们带来威胁的甲基汞更多地是来自水稻而非鱼类。在最近的一项研究中,我们探讨了这个问题的严重性,及其未来可能的发展方向。

我们发现,中国未来的排放轨迹可能会严重影响其水稻中的甲基汞含量。这不仅对中国,而且对煤炭用量不断增长且以稻米为主食的亚洲都有着重大影响。这也与各国都在执行的《水俣公约》息息相关,该公约是一项保护人类健康和环境免受汞污染影响的全球性条约。

为什么会出现水稻汞污染?

21世纪初以来,中国对一些地区的大米进行了甲基汞含量检测。这些地区的汞矿开采及其他工业活动导致土壤中的汞含量很高,而土壤中的汞随后都被水稻吸收了。然而,最近的研究表明中国其他地区稻米中的甲基汞含量也在升高。这说明空气中的汞(由燃煤电站等污染源向大气排放,并随后沉降到陆地上)也是导致大米中汞含量升高的一个因素。

为了更好地了解甲基汞通过气相沉积在水稻中的积累过程(所谓气相沉积是指空气中的汞通过降雨或者直接沉降到陆地的过程),我们构建了一个计算机模型,分析土壤和大气中的甲基汞对水稻汞含量的相对影响,然后预测了不同排放情境下,未来水稻中的甲基汞浓度的变化情况。煤炭燃烧等工业活动排入大气中的汞在鱼类体内积累,但针对煤炭使用不断扩大的中国和亚洲其他地区的水稻汞污染的研究并没有那么多。图片来源:马克西姆·梅尔尼科夫(  ),禁止商用及演绎。

虽然水稻中甲基汞含量要低于鱼类,但在中国中部地区人们摄入的稻米要远多于鱼类。研究表明,土壤汞污染地区居民摄入的甲基汞量要高于美国环保署每天每公斤体重0.1微克的参考剂量,设定这一参考剂量是为了防止出现智商下降等不良的健康影响。近来有数据表明,摄入量低于参考剂量也有可能导致其他神经发育问题。然而,针对甲基汞对稻米消费者影响的专项研究少之又少。

为了确定这一问题的影响范围,我们以汞模型为基础,参照中国的大米产地分布图,比较了几个汞沉积预计较高的地区。我们发现,汞沉积水平高的省份也是水稻生产大省。中部地区的7个省份(河南、安徽、江西、湖南、贵州、重庆和湖北)占中国稻米产量的48%,而来自大气的汞沉积量却几乎是其他地区的两倍。

根据我们的计算,到2050年,汞沉积量既有可能会增加近90%,也有可能减少60%,这取决于未来的政策和技术。

我们的建模方法

为了了解大气中的汞如何转化为甲基汞进入稻米中,我们建立一个用于模拟稻田中汞的模型。环境中的甲基汞是由生物活动(具体来说是细菌)制造的,这一过程通常发生在湿地和淤泥等漫灌水环境中。类似地,生长季节的水稻田里充满了水,水稻根系周围富含营养的环境也有利于细菌的滋生和甲基汞的产生。

我们的水稻田模型模拟了汞如何在水、土壤和水稻等稻田生态系统的各个部分转变形态、积累并最终转化为甲基汞的。

在我们的模型中,汞通过沉积和灌溉进入不流动的漫灌水中,然后在水、土壤和植物之间移动。我们首先初始化并校准了该模型,随后进行了为期5个月的实验,即从插秧到收获的时长,随后将我们的实验结果和中国各地稻米汞含量的测量值进行比较。我们还模拟了不同的大气沉降和土壤汞浓度的情境。

我们的模型虽然简单,但能够重现中国各省稻米中甲基汞浓度变化的情况,还能准确地反映土壤汞浓度与稻米中甲基汞含量之间的正相关。

但问题不全在土壤。水中的汞(来自稻田漫灌水或土壤中的水)也会影响稻米中甲基汞的浓度,其影响程度取决于土壤和水中这两个不同的吸收过程的相对速率。在某些情况下,大气中的汞沉降到稻田里后可能会进入稻米中。这说明,改变汞排放可能会影响稻米中汞的含量。

汞排放影响稻米

未来稻米中的汞含量会发生怎样的变化?

我们研究了一个高排放情境(假设2050年之前没有新的政策出台来控制汞的排放)和一个低排放情境(假设中国减少煤炭使用,燃煤电站也配备先进的汞排放控制技术)。在前一种情况下,中国稻米平均甲基汞含量提高了13%,后一种情况则降低18%。稻米中甲基汞含量下降最多的地区是政策严格控制的中部地区,那里稻米产量高,且稻米是甲基汞暴露的重要来源。

因此,管理稻米中的汞浓度需要双管齐下,同时解决空气沉降和水土污染。了解当地情况也很重要:我们的模型没有考虑到的土壤酸度等其他环境因素也会影响甲基汞的产生和在稻米中累积。

改变稻米生产策略也能有所帮助——例如,采用土壤干湿交替模式种植水稻可以降低耗水量、甲烷排放量以及稻米中甲基汞的含量。

我们设定的情境可能低估了《水俣公约》中控汞措施给中国带来的潜在健康利益,中国也是该公约的缔约国之一。我们的情境仅考虑了电站排放进入空气中的汞,但《公约》中的防控措施也涉及其他部门的排放,并且禁止汞开采,解决受污染场所和土地以及水排放的问题。

减少汞排放对其他水稻生产国也有好处,但目前中国以外可用的数据很少。然而我们的研究表明,汞污染问题并非无稽之谈,从政策上下功夫确实有用。

Tuesday, August 14, 2018

联合国:中国秘密囚禁百万维族人对其政策“洗脑”

联合国消除种族歧视委员会称有“可靠情报”,证明中国在新疆的“反极端主义中心”秘密囚禁百万维吾尔族人。
由俞建华率领的中国代表团在为期两天的日内瓦中国政策审核会上对联合国专家提出的问题给予答复。
中国代表团在大会发言时指出,"没有随意的监禁,根本不存在'再教育中心'"。
中方说,新疆自治区政府在打击"暴力恐怖活动"的同时,给罪行确凿的犯罪分子学习生活技能、重新融入社会的机会,地点在职业教育和就业培训中心。
中国代表团一名胡姓成员通过翻译表示,"将100万维族人关押在再教育中心的说法完全同事实不符。"
他补充道,"没有压迫少数民族,没有打着反恐旗号剥夺宗教自由。"但他说,那些被宗教极端主义分子迷惑的人,理应得到帮助,重返社会和重获教育权利。
联合国消除种族歧视委员会发表报告之际,宁夏自治区就发生穆斯林回族相关事件,有回族人不满当局试图拆卸一座清真寺,与警方发生对峙。
海内外中国民主人士发起联署,抗议对维吾尔人的野蛮暴行,要求中共立即停止政治迫害。而中国官媒《环球时报》发表社评表示,"捍卫新疆和平稳定,就是最大的人权"。
全球40多名中国学者和异议人士,联名呼吁外界关注新疆正在发生的人权灾难,包括《北京之春》荣誉主编胡平、前六四学生领袖王丹、流亡维权律师滕彪等人。
联署呼吁美国政府继续为新疆人权发声,进一步采取有效手段向中共当局施压,呼吁联合国出面调查,并谴责发生在新疆的恶劣行径。
联合国消除种族歧视委员会,星期五(8月10日)在日内瓦开始审议中国履行《消除一切形式种族歧视国际公约》报告。
在首日聆讯上,美国籍委员、人权律师盖伊‧麦克杜格尔( )提出,根据可靠情报,中国涉嫌将百万名维吾尔族穆斯林,送到秘密的“政治再教育营”扣留,以打击当局所谓的“宗教极端主义”。麦克杜格尔表示,委员会对有关情况“深表关注”。
维吾尔族人占新疆人口约45%,过去几个月已多次传出穆斯林被扣留的消息。
BBC驻日内瓦记者福克斯(Imogen Foulkes)报道称,国际特赦组织与人权观察等国际民间组织,向委员会提交有关证据,称当局强迫被关押的维族人听政府的政策宣讲。
代表流亡维族人、被北京定性为“暴力恐怖组织”的世界维吾尔代表大会表示,被扣押的人经常要挨饿,“再教育营”内的酷刑虐待行为普遍,而这些人并没有被起诉任何罪行,亦无法通过法律途径维权。
海外人权团体之前已多次提出有关秘密“再教育营”的问题,美国新奥尔良罗耀拉大学历史系助理教授莱恩‧图姆( )今年5月在《纽约时报》撰文,称中国自2016年以来,至少耗资六亿八千万元人民币,在新疆各地兴建拘留设施。
在4月,美国高级外交官石露蕊( )称,数以万计的人被扣留在“再教育营”,中国外交部反驳,指新疆各族人民安居乐业。
中国代表团团长,中国常驻联合国日内瓦办事处代表俞建华,在联合国消除种族歧视委员会开场发言中表示,今年3月全国“两会”通过的《宪法》修正案,提出要“维护和发展各民族的平等团结互助和谐关系”。俞建华称,在中国政府的努力下,“民族地区经济大幅发展,人民生活水平持续提高”,“不断提高少数民族享受各项人权的水平”。
中国去年4月实施的《新疆维吾尔自治区去极端化条例》,将维族女人穿戴罩袍、男人蓄须等行为,与极端主义相提并论,并加以禁止。
世维会今年7月发放消息,称身穿长身外衣的维族女性,被人当街剪短衣服,迫使她们放弃穆斯林传统。
人权观察亦在5月份发表报告,称中共在新疆扩大“结对认亲”运动,要求党员干部到穆斯林家庭居住,向穆斯林宣传社会主义价值观。中共新疆自治区党委书记陈全国今年2月接受《人民日报》专访时表示,全疆百万干部职工与结对认亲户“同吃同住同劳动”,在冬至期间一起按照华北汉人习俗食饺子,“亲如一家、其乐融融”。
就在联合国委员质疑新疆穆斯林人权状况之际,宁夏自治区同心县星期四起,有数百名回族穆斯林,到县城韦州清真大寺外聚集,阻止当局拆卸清真寺。

Monday, August 13, 2018

श्रीदेवी अगर आज ज़िंदा होतीं तो...

बीते 15 सालों में सिर्फ दो फ़िल्में करने के बाद भी श्रीदेवी के चाहने वालों की आज भी कमी नहीं है. वो ज़िंदा होतीं तो आज वो 55 साल की हो जातीं.
श्रीदेवी उन ख़ास अदाकारों में थीं जिन्होंने जेंडर और भाषा की सीमाएँ लांघी और हिंदी, तमिल, तेलुगू समेत कई भाषाओं में सुपरस्टार बनकर राज किया.
इस साल फ़रवरी में दुबई में उनकी मौत हो गई जिसे लेकर काफ़ी विवाद भी हुआ. अब जब वो नहीं हैं तो मैंने उन्हें उन पोस्ट के ज़रिए जानने की और समझने की कोशिश की जो वो सोशल मीडिया पर डालती थीं.
सोशल मीडिया पर कैसी थीं श्रीदेवी
एक एक्टर होने के परे, उनके कई और चे
उस तस्वीर में एक प्रेमिका नज़र आती है जहाँ बोनी कपूर के साथ आइसक्रीम खाते हुए फ़ोटो डाली है और कैप्शन दिया है- लव इज़ हैविंग चॉकोबार्स टूगेदर.
कभी वो अपने पिता को शिद्दत से याद करती बेटी के तौर पर नज़र आती हैं.
कभी एक फ़ैशन आइकन और कभी एक पेंटर. वो पेंटिंग भी करती हैं, उनके बारे में ये बात कम ही लोगों को पता है.
जून 2013 की एक ट्विटर पोस्ट में, "श्रीदेवी ने अपनी बनाई एक पेंटिंग की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है- ये मेरी शुरुआती पेंटिंग्स में से एक है, थॉट्स."
एक और पोस्ट में वो एक नई पेंटिंग शेयर करते हुए ट्वीट करती हैं, ये एक श्रद्धांजलि है जो मैंने जाह्नवी के लिए बनाई है- माइकल जैक्सन की.
उनके फ़िल्मी सफ़र को समझने की कोशिश में मैंने उनकी शुरुआती तमिल फ़िल्म देखी जो एक पौराणिक कथा पर आधारित थी और 4-5 साल की श्रीदेवी ने भगवान मुरुगन का रोल किया था जो अपने जादुई स्पर्श से एक बीमार बच्चे को ठीक देते हैं.
ये सीन मुझे हमेशा याद रहता है. क्या श्रीदेवी ने अपनी फ़िल्मों में यही नहीं किया- एक जादुई स्पर्श और एहसास से फ़िल्म में अपने इर्द-गिर्द सब कुछ बहुत सुंदर बना देती थीं वो- चाहे वो सदमा हो, चांदनी हो, इंग्लिश विंग्लिश हो या लम्हे.
मई 1985 में फ़िल्मफ़ेयर के कवर पर श्रीदेवी की फ़ोटो छपी और उन्हें एम्प्रैस यानी महारानी कहा गया. हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में आए तब उन्हें कुछ ही साल हुए थे.
ये उनकी लोकप्रियता का ही कमाल था कि उन दिनों एक ही फ़िल्म कई भाषाओं में बनती थी जिसमें हीरो बदल जाते थे पर हीरोइन श्रीदेवी ही रहती थी.
1983 में फ़िल्म मवाली में जितेंद्र, जयाप्रदा और श्रीदेवी थे जो तेलुगू में श्रीदेवी के साथ बनी थी और तमिल में श्रीदेवी और रजनीकांत के साथ.
इसी तरह सदमा भी पहले तमिल में कमल हासन के साथ बनी और हिंदी में भी श्रीदेवी को ही रखा गया वरना आमतौर पर हीरोइन बदल दी जाती थी.
हरे थे. ट्विटर पर अक्सर वो एक माँ के तौर पर नज़र आतीं जो दुलार भरी ऐसी फ़ोटो डालती जिसमें उनकी बेटियाँ साथ में हैं.
या मिस्टर इंडिया की खोजी पत्रकार जो ज़रूरत पड़ने पर कैबरे भी कर सकती थीं, चालबाज़ में ज़बरदस्त कॉमेडी या फिर इंग्लिश-विंग्लिश की एक माँ और पत्नी जो कुछ ठिठके और हिचकते हुए कदमों से घर की दहलीज़ से निकलकर कुछ कर गुज़रने वाली गृहिणी या दिल को झकझोर देने वाली सदमा की वो लड़की ...
इस साल श्रीदेवी सदमा की 35वीं सालगिराह मना रही होतीं, रजनीकांत के साथ तमिल-कन्नड़ फ़िल्म प्रिया के 40 साल, अपनी शादी की 22वीं वर्षगाँठ मना रही होतीं...और अपनी बेटी जाह्नवी की पहली फ़िल्म धड़क देखतीं.
अगर श्रीदेवी ज़िंदा होती तो...