टेस्ट सिरीज़ के शुरुआती दो मैच
गंवाने और ख़ासी आलोचना का सामना करने के बाद टीम इंडिया ने नॉटिंघम में
खेला गया तीसरा टेस्ट जीत लिया है. पांचवें दिन 10 मिनट और 17 गेंदों में
विराट कोहली की टीम को जीत का स्वाद मिल गया. इंग्लैंड में ये भारतीय टीम
की सातवीं जीत है.
लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट में एकतरफ़ा
धुलाई के बाद 203 रनों की ये जीत टीम इंडिया के लिए क्या अहमियत रखती है,
इसे आसानी से समझा जा सकता है. जो रूट ने टॉस जीतकर टीम इंडिया को पहले
बल्लेबाज़ी की दावत दी और भारतीय टीम ने इसका पूरा फ़ायदा उठाया.साल 2002 में हेडेंग्ली में मिली जीत के बाद ये जीत भी भारतीय टीम के लिए यादगार रहेगी. लेकिन जीत तक पहुंचना इतना आसान नहीं था. पहले दो टेस्ट में इंग्लैंड के प्रदर्शन से लग रहा था कि आगे भी ऐसा ही होने वाला है.
लेकिन भारतीय टीम ने इस बार दांव पलट दिया. बल्ला चला, गेंदबाज़ भी फ़ॉर्म में दिखे और फ़ील्डिंग भी वर्ल्ड क्लास साबित हुई. इस जीत के पांच बड़े कारण हैं जिन्होंने
इस टेस्ट सिरीज़ के पहले मैच में भी कप्तान विराट कोहली ने दोनों पारियों में मिलाकर 200 रन बनाए थे. लेकिन भारतीय टीम का दूसरा कोई बल्लेबाज़ उनका साथ नहीं दे सका. नतीजा ये हुआ कि चौथी पारी में महज़ 194 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही टीम इंडिया 31 रनों से मैच हार गई.
लेकिन तीसरे टेस्ट में कोहली के बल्ले ने फिर कमाल दिखाया और इस बार उन्हें दूसरे बल्लेबाज़ों का भी साथ मिला. संयोग से इस बार भी दोनों पारियों में उन्होंने 200 रन बनाए. पहली पारी में 97 रन और दूसरी में 103 रन.
साल 2014 वाली टेस्ट सिरीज़ में विराट कोहली का बल्ला ख़ामोश रहा था और उनकी काफ़ी आलोचना भी हुई थी. लेकिन इस बार ऐसा नहीं है. कप्तान रन बना रहे हैं और वो भी आक्रामक अंदाज़ में. सिरीज़ के तीन टेस्ट में खेली छह पारियों में कोहली ने अब तक कुल 440 रन बनाए हैं.
अब तक इस सिरीज़ में रन बनाने के मामले में वो सबसे आगे हैं. उनके नाम दो शतक और दो अर्द्धशतक हैं और औसत है 73.33. स्ट्राइक रेट है 58.43 का.
नॉटिंघम टेस्ट की पहली पारी में कोहली के 97 रन और अजिंक्ये रहाणे के 81 रनों की बदौलत भारतीय टीम 329 रनों के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंची थी. इस पारी में हार्दिक पंड्या के बल्ले ने निराश किया. उन्होंने महज़ 18 रन बनाए.
लेकिन किसी भी मैच में पंड्या से ध्यान हटाना आसान नहीं है. बल्ले ने उनका साथ नहीं दिया तो गेंद उनके साथ हो गई. इंग्लैंड की पहली पारी में हार्दिक पंड्या ने महज़ छह ओवर डाले और पांच विकेट लेकर मैच की शक्ल ही बदल दी.
ज़्यादा तेज़ रफ़्तार न होने के बावजूद पंड्या ने लाइन-लेंग्थ के बूते अंग्रेज़ बल्लेबाज़ों का जीना मुहाल कर दिया. वो क्रीज़ संभालते, गेंद बल्ले का किनारा चूमती और पीछे विकेटकीपर या स्लिप फ़ील्डर के हाथों में समा जाती.
ये किसी भी टेस्ट में पंड्या की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ी है. इसके बाद भारतीय टीम की दूसरी पारी में तेज़ खेलते हुए उन्होंने 52 रन बनाए और भारत का कुल स्कोर 500 के पार चला गया. इस बीच उन्होंने ये भी कहा कि कपिल देव से उनकी तुलना बेमानी है. वो हार्दिक पंड्या हैं और वही रहना चाहते हैं.
इस सिरीज़ में अब तक भारतीय टीम इसलिए हार रही थी क्योंकि ऊपरी क्रम नई गेंद की चमक उतार नहीं पा रहा था और मध्यक्रम को स्विंग गेंदों के सामने परेशानी हो रही थी. लेकिन नॉटिंघम टेस्ट में ऐसा नहीं हुआ.
टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज़ों ने पहली पारी के बाद दूसरी पारी में सधी हुई शुरुआत की. शिखर धवन ने 63 गेंदों में 44 रन और के एल राहुल ने 33 गेंदों में 36 रन बनाए. पहली विकेट गिरी 60 पर और दूसरी 111 रनों पर.
सलामी बल्लेबाज़ों से अलग चेतेश्वर पुजारा ने भी दूसरी पारी में बढ़िया हाथ दिखाए और 208 गेंद खेलकर 72 रन बनाए. शुरुआती तीन बल्लेबाज़ों के बढ़िया खेल दिखाने के भरोसे टीम इंडिया ने सुनिश्चित किया कि इंग्लैंड के सामने ऐसा लक्ष्य रखा जाए, जिस तक पहुंचना उसके लिए मुश्किल हो जाए.
ज़ाहिर है, इस मैच में भारतीय टीम जीत तक इसलिए पहुंच सकी क्योंकि कोहली के अलावा दूसरे बल्लेबाज़ों ने भी अपने विकेट आसानी से नहीं दिए. स्विंग होती गेंदों को लीव किया गया और कमज़ोर गेंदों पर प्रहार भी.
कहते हैं कि बल्लेबाज़ को रन बनाने के लिए कई अच्छे शॉट की ज़रूरत होती है और गेंदबाज़ को विकेट चटकाने के लिए सिर्फ़ एक अच्छी गेंद चाहिए होती है. लेकिन यही एक गेंद कभी-कभी काफ़ी देर लगा देती है.
दूसरी पारी में इंग्लैंड की टीम 521 रनों के नामुमकिन लक्ष्य का पीछा कर रही थी और मक़सद मैच बचाना था. पहले इशांत शर्मा और फिर मोहम्मद शामी ने टीम इंडिया को बढ़िया शुरुआत दिलाई. इंग्लैंड के चार विकेट 62 रन पर गिर गए थे और लग रहा था कि मैच चाय तक ख़त्म हो जाएगा.
लेकिन इसके बाद जोस बटलर (106) और बेन स्टोक्स (62) के बीच लंबी साझेदारी हुई. दोनों ने मिलकर 363 गेंद खेली. फिर पारी के 80 ओवर पूरे होने के बाद गई गेंद मिली और बुमराह ने दिखाया कि वो इतने ख़तरनाक क्यों हैं.
पहले उन्होंने तेज़ी से अंदर आती गेंद पर बटलर को पगबाधा आउट किया और अगली ही गेंद पर बेयरस्टो को मिलती-जुलती गेंद पर बोल्ड कर पवेलियन लौटाया. बुमराह ने इस मैच में 85 रन देकर पांच विकेट झटके. और सबसे ज़रूरी ये है कि बटलर और स्टोक्स की ख़तरनाक होती जोड़ी को तोड़ा.
भारत को टेस्ट सिरीज़ में मुकाबले में रखा.
No comments:
Post a Comment