मैगलेन की जलसंधि के रास्ते में कई द्वीप और मुहाने पड़ते हैं. 600 किलोमीटर लंबे रास्ते से गुज़रना इतना आसान नहीं है. फिर भी, नाविकों के
लिए, केप हॉर्न से होकर जाने के बजाय मैगलेन जलसंधि से गुज़रना आसान था.
क्योंकि केप हॉर्न वाले रास्ते से जाने पर भयंकर कहे जाने वाले ड्रेक पैसेज
से गुज़रना पड़ता था. ये समुद्री रास्ता, अंटार्कटिका के साउथ शेटलैंड
द्वीपों और केप हॉर्न को अलग करता है.
1914 में मध्य अमरीका को काटकर
बनी पनामा नहर ने अटलांटिक और प्रशांत महासागर के बीच दूरी कम कर दी.
मैगलेन जलसंधि से जहाज़ों का गुज़रना कमोबेश बंद ही हो गया.
पर,
ऑस्ट्रेलिया से आने वाले जहाज़ों के लिए पनामा नहर के पश्चिमी हिस्से से प्रवेश करना मुश्किल होता था. पामीर जैसे बड़े जहाज़ों के लिए ये और भी
मुश्किल होता था. इसी वजह से मेरे दादाजी के जहाज़ को पूरे दक्षिण अमरीका का चक्कर लगाकर अटलांटिक महासागर में आना पड़ा. वो किसी कारोबारी जहाज़ का
मैगलेन जलसंधि से गुज़रने का आख़िरी सफ़र था. मेरे दादा को इस पर बहुत
फ़ख़्र था.
पुंता अरेनास से दूर होते ही परछाइयां भी साथ छोड़ देती हैं. गहरे
अंधेरे रास्ते डराने लगते हैं. सर्द हवाओं के थपेड़े शरीर को जमा देते हैं.
यहां से पास ही पड़ने वाले अंटार्कटिका की सैर के लिए छोटी नाव पर सवार होकर जाया जा सकता है. यहां आप को सफ़ेद चमकते ग्लेशियर के दीदार होते हैं.
ऐंसवर्थ की खाड़ी से गुज़रने पर भयंकर सन्नाटे से सामना होता है. इसे पैटागोनिया मोमेंट के नाम से जाना जाता है.
यहीं पास में आप को टकर द्वीप पर मैगलेन पेंगुइन दिखते हैं. यहां के परिंदे बहुत बदबू करते हैं.
चिली
के इस कोने से अंटार्कटिका इतनी ही दूरी पर है जैसे हाथ पकड़ कर क़रीब की किसी चीज़ को छू लेना. चिली के इस सुदूर इलाक़े में स्थित पिया ग्लेशियर बहुत मशहूर है. मेरे दादा यहां से गुज़रने के तजुर्बे को बहुत चाव से बताते
थे. वो कहते थे कि पहाड़ों के बीच बर्फ़ के टुकड़े तैर रहे थे. ये मंज़र याद कर के मेरे दादा कहते थे कि वो दूसरी दुनिया का लगता था. मेरे दादा को
अपने जीवन में बहुत बाद में जाकर पता चला कि उस तैरती बर्फ़ को असल में ग्लेशियर कहते हैं.
पिया ग्लेशियर कभी चौदह वर्ग किलोमीटर में फैला
हुआ था. पर अब ये सिकुड़ कर महज़ सात वर्ग किलोमीटर का रह गया है. जब मैं पास ही टहल रहा था तो ग्लेशियर से टूटकर समंदर में मिलती बर्फ़ की आवाज़
साफ़ सुनाई दे रही थी.
बर्फ़ के तैरते टुकड़ों से गुज़रते हुए मेरे
जहाज़ के क़रीब से एक व्हेल गुज़री तो मेरी निगाह बरबस उस पर पड़ी. कई
डॉल्फ़िन भी शोर मचाती हुई गुज़रीं.
मेरे दादा का जहाज़ पामीर, केप हॉर्न पर नहीं रुक पाया था. पर उन्हें वो
शैतानी चट्टानों वाला द्वीप हमेशा याद रहा. वो कहते थे कि 'मुझ से पहले
सैकड़ों लोग वहां पर गुज़रते हुए जान गवां चुके थे.'
उस द्वीप पर
खड़े होकर मुझे अपने दादा की बहुत याद आ रही थी. वो अगर ज़िंदा होते, तो
मेरे सफ़र के बारे में क्या कहते, ये ख़याल ही मुझे रोमांचित कर रहा था.
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